Friday, January 27, 2012

Diary Pages



गुनगुनाते हुए अंचल की हवा दे मुझको,
उंगलिया फेर कर बालों में सुला दे मुझ को !



ये तीन कमरों का अपना घर और ये सुलगती जिंदगी अपनी,
वहीँ हसरत के ख्वाबों को भटकता छोड़ आए हैं । 


Wednesday, January 25, 2012

Untold



नयी दुनिया बसा लेने की एक कमजोर चाहत में  !
पुराने घर की  दलाहीजों   को सुना छोड़ आए हैं !!


Thursday, January 12, 2012


कोई ठोकर लगी अचानक  जब-जब चला सावधानी से ,
पर बेहोशी में मंजिल तक  जा पहुंचा हूँ  आसानी से  !



Friday, January 6, 2012

Untold


तुम जिधर जा रही थी वह रास्ता मेरे मनं के भीतर से जाता न था,
मैं तुम्हे खिंच लाऊ, ऐसा कोई मेरा तुमसे नाता न था !!



 

Thursday, January 5, 2012

खामोशियाँ

जाने कैसी नासमझी थी वह,
समझ न पायी हालात को..
जज्बात को  साँझा करने से पहले तल्खिया ले आई झंझावात  को ,
चलो अच्छा ही हुआ , अब कोई शिकायत नहीं ..
अपने ही दायरे में रह कर ओढ़  लूँगा अब खामोशियाँ  !!